ताज़ा खबरें

7/recent/ticker-posts

Barabanki: समुदाय विशेष को याद आ रहे लाला, पोलराइजेशन पर वोटिंग से की तौबा,बिगड़ेगा एक पार्टी का खेल?

 

Barabanki News... कहते हैं, किसी चीज की कद्र इंसान को उस वक्त पता चलती है,जब वो उससे दूर हो जाती है। नगर पालिक नवाबगंज के समुदाय विशेष के मतदाताओं के साथ भी यही हो रहा है। वो पूर्व चेयरमैन रंजीत बहादुर श्रीवास्तव लाला के कार्यकाल अब से बेहतर मान रहे हैं। यहीं नहीं अब वो अपने लिए किए गए उनके कार्यों की सराहना भी कर रहे हैं। साथ ही वो अपने वोटिंग ट्रेंड से सबक ले रहे हैं और अपनी गलती पर पछतावा करते हुए मुद्दों पर वोटिंग का मन भी बना रहे हैं। ऐसे में एक समुदाय विशेष के हितों की सबसे बड़ा दावा करने वाली एक पार्टी के लिए बड़ा खतरा उभरकर सामने आने लगा है। 

 दरअसल नवाबगंज नगर पालिका पर रंजीत बहादुर श्रीवास्तव लाला 15 सालों तक काबिज रहे। एक बार वो और दो बार उनकी पत्नी ने चुनाव ने जीता। तीनों ही बार लाला ने कट्टर हिंदुत्वादी नेता की छवि बनाकर चेयरमैन की कुर्सी हासिल की। ध्रुवीकरण की कोशिश में एक समुदाय विशेष के लिए कई बार उन्होंने आपत्तिजनक बयान दिए। जिससे उनकी एक तब्के में आलोचना हुई, लेकिन इसके बावजूद उऩ्होंने जीतने के बाद हमेशा राजधर्म का पालन किया और आवाम के बीच सुविधाएं पहुंचाने में कओ भेद नहीं किया। 2023 के नगर पालिका के चुनावों में रंजीत बहादुर श्रीवास्तव के खिलाफ माहौल बना और वो चुनाव हार गए। लाला के खिलाफ बने माहौल में नए चेयरमैन ने बड़ी जीत हासिल की। इसमें समुदाय विशेष की भी खास भूमिका रही। लाला को हराने का सेहरा भी उसी समुदाय विशेष ने अपने सिर बांधा और मौजूदा चेयरमैन से खूब आस लगा ली। लेकिन कोई 2 साल के वक्फे में ही समुदाय विशेष का मोह भंग हुआ और वो लाला रंजीत के कार्यकाल को अपना विरोधी होने के बावजूद बेहतर बताने लगे। समुदाय विशेष का आम आदमी हो, या व्यापारी, नेता हों या छोटे कारोबारी, या फिर नगर पालिका के ठेकेदार हर कोई लाला रंजीत के कार्यकाल को बेहतर बता रहा है। नगरपालिका में काम करने वाले एक समुदाय विशेष के ज्यादातर ठेकेदारों का दुखड़ा है कि उन्हें काम नहीं मिल रहा है। दबी जुबान में ये भी कहा जा रहा है कि ठेके पट्टे एक जाति विशेष के लोगों के लिए ही आरक्षित हैं। समुदाय विशेष का आम आदमी भी इन दिनों नाली,खड़ंजे, सड़क, सफाई और नगर पालिका से मिलने वाली मूलभूत समस्याओं को लेकर लाला रंजीत के कार्यकाल बेहतर बता रहा है। छोटे व्यापारी जिनको लाला रंजीत ने रोजगार का जरिया उपलब्ध कराया उनके रोजगार पर जब संकट गहराया,तो उन्होंने भी लाला रंजीत के कार्यकाल को अपने लिए बेहतर बताया। कई छोटे व्यापारी लाला रंजीत के पास अपनी समस्या लेकर गए भी,लेकिन लाला ने अपनी मजबूरी बताकर हाथ खींच लिया। इस मामले पर एक समुदाय विशेष के कई लोग सोशल मीडिया पर भी मुखर हो रहे हैं। हैरान करने वाली बात ये सोशल मीडिया पर बंद जुबान में विरोध करने वालों में उसी पार्टी के लोग शामिल हैं जिनके टिकट और समर्थन से मौजूदा चेयरमैन कुर्सी तक पहुंचे हैं।

नगर पालिका नवाबगंज में समुदाय विशेष के लोग सिर्फ पूर्व चेयरमैन के कार्यकाल को बेहतर नहीं बता रहे। बल्कि अब वो इससे अपने किए से सबक लेकर मुद्दों पर वोटिंग करने का मन बना रहे हैं। पछतावे के बाद समुदाय विशेष के एक बड़े हिस्से ने पोलराइजेशन पॉलेटिक्स से दूर रहने की सीख ली है। पुराने अनुभवों से सबक लेते हुए वो ऐसे उम्मीदवार और नेता के चुनाव के लिए मन बना रहे हैं,जिससे अगर फायदा ना हो, तो कम से नुकसान भी ना हो और नुकसान अगर हो भी, तो कम से कम। ऐसे में समुदाय विशेष के हितों का दावा करने वाली एक पार्टी विशेष के लिए खतरे घंटी बजती सुनाई देने लगी है। अगर वक्त रहते इन हालात पर काबू नहीं हुआ तो हालत चिड़िया चुग गई खेत जैसे होगी।


Lala remembering a particular community, will a party game be spoiled?

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ